मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने दहेज प्रताड़ना के मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि घरेलू विवाद को दहेज प्रताड़ना का रूप देना कानून का दुरुपयोग है.. ऐसे केस खारिज किए जाएं..जेएमएफसी न्यायालय में चल रहे ऐसे ही एक (दहेज प्रताड़ना) केस को हाईकोर्ट ने निरस्त किया है।
वीओ- दहेज प्रताड़ना के एक मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा है कि परिवार में होने वाले छोटे-छोटे घरेलू विवाद को दहेज प्रताड़ना का रूप देना और फिर पूरे परिवार को पुलिस केस में फंसा देना कानून व न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है..ऐसे मामलों को खारिज कर देना चाहिए…इस मामले में एडवोकेट अवधेश सिंह भदौरिया ने अपने पक्षकार शैलेंद्र कुमार मिश्रा की और से हाईकोर्ट के समक्ष तर्क प्रस्तुत कर बताया कि पुलिस ने मामले की निष्पक्ष विवेचना कर सच्चाई जानने का प्रयास ही नहीं किया है..भोपाल में रहने वाले ताऊ ससुर मुन्नालाल मिश्रा, भिंड में रहने वाले जेठ बृजमोहन मिश्रा, गुवाहटी इंटेलिजेंस ब्यूरो में पदस्थ देवर योगेंद्र मिश्रा और गर्भवती देवरानी रजनी मिश्रा के खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज कर आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया जबकि एफआईआर में दहेज प्रताड़ना के आवश्यक तथ्य ही मौजूद नहीं है.. हाईकोर्ट ने तर्कों से सहमत होते हुए ऐसे प्रकरण को कानून का दुरुपयोग बताया..और सभी आरोपियों के खिलाफ जेएमएफसी न्यायालय में चल रहे मुकद्दमे को निरस्त कर दिया है.. आपको बता दें कि ग्वालियर के शताब्दीपुरम निवासी शैलेंद्र कुमार मिश्रा का विवाह 2013 में दीनदयाल नगर निवासी निशा से हुआ था.. 20 जून 2022 को दोनों के बीच विवाद हुआ और उसके बाद निशा ने अपने पति सहित ससुराल पक्ष के सभी लोगों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करवा दिया था..












