मानस भवन: नगर निगम को करोड़ों का चूना, वसूली के बजाय अनुमति देने की तैयारी

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व्यवसायिक गतिविधियां प्रतिबंधित, मानस भवन खाली कराने के निर्देश फिर भी पालन नहीं

ग्वालियर/ बिल्लू बादशाह ब्रेकिंग

भ्रष्टाचार के मामलों में बदनाम हो चुके नगर निगम के अधिकारी जनता के खून पसीने के टैक्स के पैसे से मौज कर रहे हैं। कभी संपत्ति कर, कभी जलकर , कभी गारबेज शुल्क लगाकर जनता पर टैक्स का बोझ डाल रहे हैं ,तो दूसरी ओर जहां से आय हो सकती है, वे स्रोत भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े हुए हैं।

एक बड़ा मामला फूल बाग स्थित तुलसी मानस प्रतिष्ठान, जिसे मानस भवन कहा जाता है, उसका है । नगर निगम में तुलसी मानस प्रतिष्ठान को 1975 में यह जगह केवल धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम करने के लिए दी थी ।बाद में संस्थान की ओर से उस पर कभी साड़ी की सेल तो कभी शादी समारोह के लिए किराए पर देने का सिलसिला जारी हो गया । आश्चर्य है कि पिछले 19 साल से नगर निगम को करोड़ों रुपए का राजस्व मिल सकता था, लेकिन जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं।

अनुमति देने की तैयारी

मानस भवन में व्यवसायिक गतिविधि देने की अनुमति के लिए एक बार फिर मेयर इन काउंसिल में प्रस्ताव लाया जा रहा है, 15 अप्रैल को होने वाली एमआईसी की बैठक में इस पर चर्चा होगी, जबकि पहले भी एमआईसी और परिषद की बैठकों में इस प्रस्ताव को खारिज किया जाता रहा है और वसूली के निर्देश दिए जाते रहे हैं।

जमीन वापस लेने के निर्देश

जब मामला तूल पकड़ा तो 1975 में मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट  निर्देश दिए थे कि इस जमीन का उपयोग केवल धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रमों के लिए है, व्यावसायिक गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। 9 अक्टूबर 2004 में नगर निगम परिषद में  तत्कालीन पार्षद (वर्तमान में नगर निगम सभापति )मनोज तोमर ने प्रस्ताव रखा था कि संस्थान से बसूली और इसे खाली कराया जाय। यह ठहराव पारित हो भी गया था, लेकिन उस पर कोई अमल नहीं हुआ ।

दिखावे की होती है कार्यवाही

जब मामला मीडिया की सुर्खियां बना या शिकायतें हुई तब तब व्यवसायिक गतिविधियां रोक दी जाती रही हैं । मामला शांत होते ही फिर उस पर व्यवसायिक गतिविधियां संचालित होने लगती है। इसमें  जिम्मेदार अधिकारियों पर अवैध वसूली के आरोप लगते रहे हैं।

करोडों की हानि

यदि नगर निगम अपनी संपत्तियो से नियमों के तहत वसूली करें तो नगर निगम का ईमनदारी से खजाना भरने लगेगा।

इनका कहना है

मानस भवन में व्यवसायिक गतिविधियां नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा हो रहा है तो मैं इस मामले में जानकारी लूंगा।

विवेक शेजवलकर, सांसद ग्वालियर

लौटा देंगे प्रस्ताव

मानस भवन में व्यवसायिक गतिविधियां संचालित करने के लिए पहले भी प्रस्ताव आया था, इसे लौटाया जाता रहा है। इस बार भी प्रस्ताव आया तो हम सर्व सहमति से उसे लौट आएंगे और पिछले बकाया की उसकी वसूली के निर्देश देंगे ।

अवधेश गौरव, सदस्य मेयर इन काउंसिल

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