गारबेज शुल्क के विरोध में सड़क पर चेम्बर ऑफ कॉमर्स

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ग्वालियर

‘गारबेज शुल्क’ के विरोध में सौंपा ज्ञापन

ग्वालियर, 3 मार्च । ‘गारबेज शुल्क’ के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन की श्रृंखला के अन्तर्गत आज चेम्बर ऑफ कॉमर्स के नेतृत्व में शहर के व्यवसायियों द्वारा नगर-निगम, ग्वालियर द्वारा जनप्रतिनिधियों के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने तथा व्यवसायियों के ऊपर की जा रही जबरन कार्यवाही को तत्काल रोके जाने सहित ‘गारबेज शुल्क’ के सहमति पूर्ण प्रस्ताव पर राज्य शासन स्तर के अधिकारियों द्वारा अनुमोदन नहीं किए जाने पर आज प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह चौहान के नाम एक ज्ञापन जिलाधीश, कार्यालय में एडीएम एच. बी. शर्मा को सौंपा गया ।

इस अवसर पर अध्यक्ष-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, संयुक्त अध्यक्ष-हेमन्त गुप्ता, उपाध्यक्ष-डॉ. राकेश अग्रवाल, मानसेवी सचिव-दीपक अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त अध्यक्ष-पवन कुमार अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष-संदीप नारायण अग्रवाल सहित संस्था के सदस्य एवं शहर के व्यवसाई सर्वश्री मनीष बांदिल, अनुराग गर्ग, सतीश गर्ग, मुकेश सांघी, संजय अग्रवाल, दीपक जैसवानी, चन्द्रकान्त अग्रवाल, विजय जौहरी, जयप्रकाश गाबरा, महेन्द्र साहू, चैतन्य गुप्ता, दिनेश अग्रवाल, नन्दकिशोर गोयल, भरत बंसल, अनिल आनन्द, आशीष अग्रवाल, ओ. पी. अरोरा, रोशन गाबरा, अमर सिंह ग्रोबर, संजय धवन, राहुल जैन, विकाश अग्रवाल, संतोष, संजय गुप्ता, मनोज सांघी, कन्हैयालाल अग्रवाल, अभिषेक चतुर्वेदी, कृष्णमुरारी शर्मा, संजीव अग्रवाल (कुक्कू), धर्मेन्द्र जैन, जितेन्द्र जाजू, पुरुषोत्तम गुप्ता, सुशांत सिंघल, शैलेन्द्र ओझा, रमेश झा, अभय गर्ग, जगदीश मित्तल, कृष्णबिहारी गोयल, सुनील अग्रवाल (मंगल), प्रितेश अग्रवाल, दीपक गुप्ता, अरुण कुमार गुप्ता, सुनील अग्रवाल (सन्नी), विनोद ओझा, डॉ. विनोद गुप्ता, विजय जौहरी आदि उपस्थित थे ।ख्यमंत्री जी के नाम सौंपा गया ज्ञापन निम्नानुसार है ः-

माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी
मुख्यमंत्री
म. प्र. शासन
वल्लभ भवन
भोपाल
द्वारा श्रीमान्‌ जिलाधीश महोदय, जिला-ग्वालियर.
महोदय,
‘म. प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री’ ग्वालियर प्रदेश की सबसे पुरानी 117 वर्ष पुरानी संस्था है । इसमें समय-समय पर आपका आगमन भी हुआ है । इस संस्था का प्रमुख काम व्यापार-उद्योग के संबंध में सरकार की नीतियों का प्रचार-प्रसार करना व सरकार की योजनाओं से उद्यमियों को लाभांवित करना है । इसके साथ यदि सरकार की नीति से म. प्र. को व्यापार-उद्योग के संचालन में कोई कठिनाई है, तो उसे सरकार के संबंधित विभाग तक पहुँचाकर दूर कराना है । इसके विपरीत MPCCI को आंदोन के मार्ग पर आगे बढ़ना पड़ रहा है । निश्‍चित रूप से इस विषय की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है ।
ग्वालियर शहर में जब ‘गारबेज शुल्क’ आरोपित किया गया, उससमय परिषद अस्तित्व में नहीं थी । नगर-निगम, आयुक्त के प्रस्ताव पर प्रशासक महोदय ने सहमति जताते हुए, इसे आरोपित कर दिया था । परिणामतः यह दरें भोपाल, इंदौर, जबलपुर की तुलना में बहुत अधिक थी । इसमें सबसे बड़ी विसंगति यह की गई कि इसे सम्पत्ति कर से लिंक कर दिया गया । मसलन सम्पत्ति कर बिना ‘गारबेज शुल्क’ जमा किए बिना, जमा नहीं किया जा सकता था । तत्काल यह विषय वर्तमान में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री-माननीय श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर जी सहि सभी की जानकारी में लाया गया और एक बैठक तत्कालीन संभागीय आयुक्त के निवास पर माननीय ऊर्जा मंत्री-श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, MPCCI के पदाधिकारी और निगमायुक्त सहित अन्य प्रशासनिक व जनप्रतिनिधियों के साथ हुई, जिसमें यह तय किया गया कि गारबेज शुल्क को ऐच्छिक कर सम्पत्ति कर जमा किया जा सकेगा और गारबेज शुल्क के युक्तियुक्तकरण पर कार्यवाही जारी रहेगी । इस निर्णय के बाद पिछले तीन वर्षों से लोग सम्पत्ति कर आसानी से जमा कर रहे है और जिन्हें नामांतरण/ट्रेड लायसेंस/अन्य निगम से संबंधित लायसेंस/नगर-निगम मार्केट के किराएदार मजबूरन गारबेज शुल्क के साथ सम्पत्ति कर जमा कर रहे हैं, नहीं तो उनकी इस प्रक्रिया को रोका जा रहा है ।
माननीय महोदय, वित्तीय वर्ष में भी जब 6% छूट के साथ सम्पत्ति कर जमा करने की अवधि समाप्त हो रही थी और सॉफ्टवेयर में गारबेज शुल्क के साथ सम्पत्ति कर जमा करने की बाध्यता को स्किप नहीं किया जा रहा था, तो यह जानकारी नगर-निगम आयुक्त एवं जनप्रतिनिधियों सहित आपको भी हमारी तरफ से पत्र के माध्यम से दी जाती रही । अंततः नगरीय प्रशासन विभाग ने सम्पत्ति कर से गारबेज शुल्क को स्किप करने का निर्णय तो किया, लेकिन बहुत सारे करदाताओं की आईडी पर गारबेज शुल्क केवल 01 वर्ष का स्किप हो रहा है और पिछले 03 वर्षों का बकाया गारबेज शुल्क के साथ ही सम्पत्ति कर को जमा करने के लिए कहा जा रहा है । जब यह जानकारी हमारे द्वारा माननीय ऊर्जा मंत्री-श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित प्रभारी मंत्री, माननीय श्री तुलसी सिलावट जी को ज्ञापन के माध्यम से दी गई, तो उन्होंने तत्काल इस पीड़ा को समझते हुए निगमायुक्त को नगर-निगम परिषद के सभापति, माननीय श्री मनोज सिंह तोमर की उपस्थिति में यह निर्देशित किया कि 6 प्रतिशत छूट के साथ सम्पत्ति कर जमा करने की अंतिम तिथि को 20 दिन बढ़ाया जाए और बिना गारबेज शुल्क के सम्पत्ति कर जमा कराया जाए एवं गारबेज शुल्क के युक्तियुक्तकरण का सहमति पूर्ण प्रस्ताव शासन स्तर पर अनुमोदन के लिए जो लंबित है, उसे भोपाल में संबंधित विभाग के मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने हेतु MPCCI के पदाधिकारियों को भोपाल आमंत्रित किया गया ।
MPCCI के आंदोलन की दिशा में बढ़ने के कारण
माननीय प्रभारी मंत्री, श्री तुलसी सिलावट जी एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद भी 6% छूट के साथ सम्पत्ति कर जमा करने की तिथि को बढ़ाया नहीं गया, जिसकी जानकारी मोबाइल एवं पत्र के माध्यम से माननीय ऊर्जा मंत्री जी को दी गई, लेकिन इस लाल फीताशाही के हाबी होने के सामने यह जनप्रतिनिधि भी असहज दिए ।
इसके विपरीत निगम प्रशासन द्वारा उद्यमियों को सम्पत्ति कर जमा करने के लिए धमकाया जाने लगा और जमा नहीं करने की स्थिति में सम्पत्ति की कुर्की की कार्यवाही बगैर इच्छा के जबरन उनको चैक आदि के माध्यम के सम्पत्ति कर जमा कराने की प्रक्रिया जारी है । इस पूरे विषय पर जब ग्वालियर शहर के आमजन में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी, तब इसे MPCCI की कार्यकारिणी समिति की बैठक में शामिल कर सभी कार्यकारिणी सदस्यों से इस पर राय ली गई, तो सभी का स्पष्ट मत था कि अगल लाल फीताशाही के तुगलकी कार्यवाही का समय रहते आंदोलन के माध्यम से विरोध नहीं किया गया, तो उद्यमियों सही आमजन को भारी आर्थिक एवं मानसिक पीढ़ा होगी । इसलिए क्योंकि जब माननीय मंत्रियों के निर्देशों की ही अवहेलना की जा रही है, तो आमजन को साथ लेकर आंदोलन के माध्यम से यह पीढ़ा आप तक पहुँचाने का कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आया । इस संदर्भ में एक वृहद बैठक ग्वालियर शहर के सभी व्यवसायिक संगठनों के साथ 02 मार्च,23 को ‘चेम्बर भवन’ में की गई । इन सभी प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझाव के आधार पर यह तय किया गया कि सबसे पहले आपके नाम एक ज्ञापन निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिया जाए, फिर यही ज्ञापन ग्वालियर शहर में जनप्रतिनिधियों की उपलब्धता पर उन्हें दिया जाए और उसके बाद भी यदि कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलता है, तो आंदोलन को तीव्र करते हुए, जनप्रतिनिधियों के निवास पर धरना, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर लाल फीताशाही की तुगलकी कार्यवाही को रेखांकित करते हुए छोटे-छोटे काले बोर्ड लगाए जाएँ, मौन जुलूस, मशाल जुलूश, बाजारों में धरना और आवश्‍यकता पड़ने पर अपने संस्थानों की लाइट बंद कर ब्लेक आउट एवं ग्वालियर बंद तक की सीमा तक इस आंदोलन को ले जाने का निर्णय लिया गया । इसी बैठक में व्यापारियों द्वारा एक विषय और भी संज्ञान में लाया गया कि अचानक नगर-निगम प्रशासन द्वारा जिन व्यवसाईयों ने स्वयं की जगह पर स्वयं के व्यापार का विज्ञापन किया है, उन्हें लाखों रुपये के नोटिस देकर जमा करने हेतु धमकाया जा रहा है । व्यवसाईयों का स्पष्ट कहना था कि यदि किसी नियम के तहत ऐसा किया जा रहा है, तो उस नियम की जानकारी निगम द्वारा पहले सार्वजनिक करनी थी, उसके बाद व्यापारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया यदि नहीं अपनाई जाती, तब कार्यवाही की जानी चाहिए थी ।
अतः हमारी माँग है कि ः-
1. गारबेज शुल्क के युक्तियुक्तकरण के प्रस्ताव के अनुमोदन तक 6% छूट के साथ सम्पत्ति कर बिना गारबेज शुल्क के जमा करने की अंतिम तिथि को 15 दिवस के लिए बढ़ाया जाए ।
2. गारबेज सुल्क के युक्तियुक्तकरण के प्रस्ताव को शासन स्तर पर सहमतिप्रदानकी जाए एवं यह दरें गारबेज शुल्क आरोपित होने की तिथि से लागू की जाए ।
3. स्वयं के लिए स्वयं की जगह पर विज्ञापन की कोई नीति है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए एवं उसके बाद यदि व्यापारी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाए एवं जो नोटिस दिए गए हैं, उन्हे निरस्त किया जाए ।
इस अवसर पर एडीएम, श्री एच. बी. शर्मा जी ने चेम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों की बात को काफी ध्यानपूर्वक सुना एवं सौंपे गए ज्ञापन को माननीय मुख्यमंत्री-श्री शिवराज सिंह चौहान जी को आवश्‍यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किए जाने का आश्‍वासन दिया ।

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