मोबाइल से बच्चों और युवाओं की पढ़ाई और कैरियर पर बुरा असर

0
166

छोटे बच्चे किशोर और युवा माइंड चीप डोमामाइन एडिक्शन के शिकार हो रहे हैं। मोबाइल पर बहुत जल्दी जल्दी नए-नए कंटेंट देखने के कारण 30 सेकंड से ज्यादा किसी भी एक विषय पर अपने मस्तिष्क को स्थिर नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण उनका किसी अन्य बात पर मन नहीं लगता है। धीरे-धीरे वे मोबाइल एडिक्शन के शिकार हो जाते हैं। सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है। इसका असर पढ़ाई और कैरियर के क्षेत्र में बुरा प्रभाव डाल रहा है।

मोबाइल से बच्चों और युवाओं की पढ़ाई और कैरियर पर बुरा असर
मोबाइल से बच्चों और युवाओं की पढ़ाई और कैरियर पर बुरा असर

विशेषज्ञों की सलाह

डॉक्टरों के पास 12 से 18 साल के बच्चे मे डोपामाइन केमिकल का जल्दी स्पाइक होनाबहुत घातक बताया गया है।जिन बच्चों को कम उम्र में मोबाइल दे दिए गए हैं। उनमें सबसे ज्यादा यह बीमारी पाई जा रही है।

रोग के लक्षण

किसी भी विषय या वस्तु पर लंबे समय तक मन नहीं लग पाता है।बार-बार विचार बदलते हैं।
हर थोड़ी देर में मोबाइल चेक करने की आदत बन जाती है। एकाग्र चित्त नहीं हो पाते हैं।किसी भी एक विषय या वस्तु पर 30 सेकंड से ज्यादा जुड़े नहीं रह पाते हैं।

बीमारी से बचाव

मोबाइल से बिना काम की एप्लीकेशन को हटा दें।सप्ताह में 1 दिन मोबाइल का उपयोग नहीं करें।
सोने की 2 घंटे पहले मोबाइल देखने की आदत बंद कर दें। डिजिटल अखबारकिताब इत्यादि पढ़ने के स्थान पर प्रिंटेड अखबार या किताब पढ़ने की आदत डालें।शॉर्ट कंटेंट को मोबाइल पर कम से कम देखें।

स्क्रीन टाइम के लिए एक टाइम टेबल तैयार करें

फिजिकल और मेंटल वैलनेस के साथ अब डिजिटल वैलनेस की तरफ भी ध्यान देना बहुत जरूरी है। अन्यथा फास्ट डोपामाइन की आदत होने सेयाददाश्त और कैरियर पर इसका विपरीत असर देखने को मिल रहा है। बच्चे और युवा चिड़चिड़े हो रहे हैं।

LEAVE A REPLY