अदालत के फैसले से राहुल गांधी की संसद की सदस्यता पर तलवार लटकी

0
209

 नई दिल्ली -कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को गुजरात के सूरत की अदालत ने मानहानि का दोषी करार देते हुए दो साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के फैसले से राहुल गांधी की संसद की सदस्यता पर तलवार लटक गई है। फिलहाल उनको 30 दिन तक उच्च अदालत में अपील करने का वक्त मिल गया है जिससे इस दौरान उनकी संसद सदस्यता नहीं जाएगी। भारतीय संसद के इतिहास में कई सांसदों को अलग-अलग कारणों से संसद सदस्यता से हाथ धोना पड़ा है।

कानून के मुताबिक, ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल्स एक्ट 1951 की धारा 8 (3) के तहत अगर किसी सांसद या विधायक को किसी अपराध में दोषी ठहराया जाता है और उसे दो साल या इससे अधिक अवधि की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी संसद या विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो जाती है। इसके अलावा वह रिहाई के छह साल बाद तक कोई चुनाव भी नहीं लड़ सकता है।

read more – उदनाबाद पंचायत झामुमो समिति का हुआ गठन, उदय बने अध्यक्ष व किसुन दास सचिव

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2013 को लिली थामस वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया केस में बड़ा फैसला दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि अगर कोई सांसद, विधायक या विधान परिषद सदस्य किसी भी अपराध के मामले में दोषी पाया जाता है और उसे कम से कम दो साल की सजा होती है तो वह तुरंत ही संसद, विधानसभा या विधान परिषद की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाएगा। यानी उसका चुनाव रद्द हो जाएगा और वह जनप्रतिनिधि नहीं रहेगा। सर्वोच्च अदालत के इस फैसले के बाद से अब तक कई नेताओं को अपने पद गंवाने पड़े हैं।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू होने के बाद सबसे पहले लालू यादव पर इसकी गाज गिरी थी। साल 2013 में लालू यादव को चारा घोटाला केस में कोर्ट ने सजा सुनाई। इसके बाद उनकी संसद सदस्यता खत्म गई थी। इसके साथ ही उनके चुनाव लड़ने पर रोक भी लग गई। तब से अब तक लालू यादव चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं।

बिहार के जहानाबाद से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के सांसद जगदीश शर्मा को गोड्डा कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित चारा घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी। अदालत ने जगदीश शर्मा को चार साल की कैद और दो लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। इससे उनकी संसद सदस्यता चली गई थी।
लक्षद्वीप के सांसद पीपी मोहम्मद फैजल को अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई है। इसके बाद उनकी सदस्यता चली गई थी। मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के एमबीबीएस सीट घोटाला केस में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद काजी रशीद को सजा होने पर उनकी सदस्यता चली गई थी। कांग्रेस ने रशीद को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में भेजा था। उन्हें एमबीबीएस सीट घोटाले में दोषी पाया गया था और सन 2013 में अदालत ने उन्हें चार साल की सजा सुनाई थी।

उत्तर प्रदेश की फैजाबाद लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद मित्रसेन यादव को ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल्स एक्ट 1951 के तहत वर्ष 2009 में संसद सदस्यता से हाथ धोना पड़ा था। उन्हें धोखाधड़ी के एक केस में सजा होने पर पद गंवाना पड़ा था। इसके अलावा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत कई नेताओं के विधानसभा और विधान परिषद सदस्यता गंवाने के भी कई मामले हैं। इनमें ताजा चर्चित मामला आजम खान का है। समाजवादी पार्टी के प्रभावी नेता और उत्तर प्रदेश के रामपुर से विधायक रहे आजम खान की सदस्यता चली गई है। आजम खान को पीएम नरेंद्र मोदी पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है। इस पर उनसे उनकी विधानसभा सदस्यता छीन ली गई।

 

LEAVE A REPLY